Bachche Ki Normal Delivery Kaise Hoti Hai – नॉर्मल डिलीवरी कैसे होती है?

Normal Delivery Kaise Hoti Hai – जब कोई महिला गर्भवती होती है तो उनके मन में प्रेग्नेंसी से जुड़े कई सवाल होते है जैसे कि उनकी डिलीवरी नॉर्मल होगी या सिजेरियन। हम आपको बता दें कि सिजेरियन ऑपरेशन से डिलीवरी होने में कम दर्द होता है लेकिन प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी के बाद रिकवर होने में अधिक समय लगता है।

अगर किसी महिला की नॉर्मल डिलीवरी होती है तो दर्द अधिक होगा लेकिन नॉर्मल डिलीवरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि महिला को रिकवर होने में बहुत ही कम समय लगता है। वैसे नॉर्मल डिलीवरी शरीर के लिए अच्छी मानी जाती है।

जब कोई महिला पहली बार माँ बनती है तो उनके मन में प्रेग्नेंसी से जुड़े कई सवाल होते है। इसलिए आज की यह पोस्ट गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद होने वाली है। इस पोस्ट को शुरू से अंत तक पूरा पढ़ें तो चलिए शुरू करते है…

नॉर्मल डिलीवरी क्या होती है –

नॉर्मल डिलीवरी का मतलब होता है कि प्राकृतिक तरीके से और बिना किसी ऑपरेशन या सर्जरी के बच्चे के जन्म की प्रक्रिया को नॉर्मल डिलीवरी कहा जाता है। अगर साधारण भाषा में कहा जाये तो प्राकृतिक तरीके से होने वाले बच्चे के जन्म को नॉर्मल डिलीवरी कहा जाता है।

Normal Delivery होने के बाद माँ को रिकवर होने में 1 महीने से भी कम समय लगता है। अगर आप नॉर्मल डिलीवरी कराने की सोच रही हो तो आपको कुछ सावधानियों का ध्यान रखना होगा जो कि इस पोस्ट में नीचे की ओर दी हुई है।

नॉर्मल डिलीवरी कितने प्रकार की होती है – Types Of Delivery

डिलीवरी दो प्रकार की होती है जो कि निम्न है।

  • नॉर्मल डिलीवरी जिसको प्राकृतिक डिलीवरी कहा जाता है। इस प्रक्रिया में दवाओं के बिना और बिना किसी सर्जरी के डिलीवरी कैसे करते हैं।
  • यह बच्चे की डिलीवरी का दूसरा तरीका होता है जिसमें प्रेग्नेंट महिला में एपिड्यूरल का इस्तेमाल करके शरीर के अंगों को सुन्न करके डिलीवरी कराई जाती है।

नॉर्मल डिलीवरी होने के लक्षण – symptoms of normal delivery In Hindi

यदि किसी गर्भवती महिला को नीचे दिए निम्न लक्षण दिखाई देते है तो नॉर्मल डिलीवरी होने के 70 प्रतिशत चांस होते है जो कि इस प्रकार है।

  • यह नॉर्मल डिलीवरी का पहला लक्षण है। जिसमें बच्चे का पैर बच्चेदानी की तरफ और सर नीचे पेल्विक की तरफ होना। इस लक्षण का पता सोनोग्राफी से लगाया जा सकता है।
  • 30 वें से 34 वें सप्ताह के बीच बच्चे की पोजीशन बदल जाना या बच्चे का सिर नीचे आ जाये तो यह भी एक Normal Delivery Ke Lakshan है।
  • गर्भवती महिला की योनि से सफेद, गुलाबी और रक्त की तरह तरल पदार्थ बहने लगे तो यह भी नॉर्मल डिलीवरी का एक संकेत हो सकता है।
  • गर्भाशय के दौरान ग्रीवा का चौड़ा हो जाना। यह चेकअप के दौरान पता चलता है।
  • डिलीवरी का समय नजदीक आने पर गुदा की मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती है। जिस कारण गर्भवती महिलाओं को पतला मल आना शुरू हो जाता है। यह भी Symptoms Few Days Before Delivery है।
  • 8 से 9 वें महीने के बीच मूत्राशय करने पर दबाब पड़ना और बार-बार पेशाब आना भी Normal Delivery Signs है। (Delivery Symptoms In 9th Month)

Normal Delivery Kaise Hoti Hai – normal delivery tips in hindi

बच्चे की नार्मल डिलीवरी टिप्स हिंदी की प्रक्रिया को जानने के लिए इसे 3 भागों में बाँटा गया है जो कि इस प्रकार है…

नॉर्मल डिलीवरी का पहला भाग – इस भाग को भी तीन चरणों में बाँटा गया है।

  1. शुरुआती चरण – यह नॉर्मल डिलीवरी का पहला चरण होता है। जिसमें गर्भाशय ग्रीवा 3 सेंटीमीटर तक खुलता है लेकिन यह डिलीवरी होने से कुछ घंटों या एक सफ्ताह पहले ही खुलता है।
  2. क्रियात्मक – यह नॉर्मल डिलीवरी का दूसरा चरण होता है जिसमें गर्भाशय ग्रीवा 3 सेंटीमीटर से 7 सेंटीमीटर तक खुलता है लेकिन इस चरण में दबाब का दर्द काफी तेज होने लगता है।
  3. परिवर्तनकाल – यह आखिरी चरण होता है। जिसमें गर्भाशय ग्रीवा 7 से 10 सेंटीमीटर तक खुलता है। इस चरण में दुसरे चरण की अपेक्षा अधिक दर्द होता है और गर्भाशय ग्रीवा गर्भाशय के द्रव की थैली फटने की संभावना भी होती है।

नॉर्मल डिलीवरी का दूसरा भाग

इस भाग में गर्भाशय ग्रीवा पूरी तरह खुलने के बाद बच्चा बाहर निकलने लगता है और संकुचन की गति भी तेज हो जाती है। इस भाग में डॉक्टर, प्रेग्नेंट महिला से जोर लगाने को कहती है। प्रेग्नेंट महिला द्वारा जोर लगाने से बच्चे का सिर बाहर आना शुरू हो जाता है।

नॉर्मल डिलीवरी का तीसरा भाग

यह नॉर्मल डिलीवरी का अंतिम भाग होता है। जिसमें गर्भाशय योनि से बाहर आ जाता है लेकिन गर्भाशय बाहर आने में 30 से 40 मिनट का समय लग सकता है। नॉर्मल डिलीवरी होने के बाद महिला को संक्रमण से बचाने के लिए पेट के निचले हिस्से पर मालिश की जाती है।

नार्मल डिलीवरी के उपाय – Normal Delivery Tips In Hindi

यदि आप गर्भवती महिला है और अपनी डिलीवरी नॉर्मल चाहती है तो आपको नीचे दिए निम्न टिप्स को अपनाना होगा जो कि इस प्रकार है।

  • पोषक तत्वों का सेवन करें और विटामिन-सी फल (संतरा, मौसंबी और नींबू पानी आदि) पियें।
  • शरीर में खून की कमी न होने दें इसलिए आयरन युक्त सब्जियों का सेवन करें।
  • पैदल चलें और अधिक से अधिक पानी पियें।
  • अपना वजन नियंत्रित रखें और अच्छी नींद लें।
  • व्यायाम व कसरत करने से नॉर्मल डिलीवरी के बाद रिकवर होने में बहुत कम समय लगता है।
  • अपने तनाव को दूर रखें और अच्छे गानें सुनें और किताबों को पढ़ें।

नॉर्मल डिलीवरी होने के बाद शरीर में होने वाले बदलाव –

बच्चे के जन्म से पहले गर्भवती महिलाओं में कई बदलाव आने लगते है लेकिन नॉर्मल डिलीवरी होने के बाद भी कई बदलाव आते है जो कि इस प्रकार है।

  • योनि स्त्राव होना।
  • स्ट्रेस मार्क्स का रहना।
  • डिलीवरी के बाद संकुचन महसूस होना।
  • स्तनों में दर्द होना।
  • बच्चे को जन्म देने के बाद कुछ दिनों तक चिड़चिड़ापन और दुखी रहना।

गर्भवती महिलाओं के लिए व्यायाम –

वैसे तो हर इंसान के लिए व्यायाम करना फायदेमंद होता है लेकिन गर्भवती महिलाओं को नीचे दिए व्यायाम करने से कई लाभ होते है। इन व्यायामों के करने से मानसिक संतुलन ठीक रहता है और नॉर्मल डिलीवरी के चाँस भी बढ़ जाते है।

  • सुबह और शाम को 20 से 25 मिनट टहलें।
  • हल्की-हल्की दौर लगाएं।
  • कुछ समय तक स्विमिंग या साइकिलिंग करें।

सिजेरियन डिलीवरी से नॉर्मल डिलीवरी कराने के फायदे –

गर्भवती महिला दो तरीकों से अपने बच्चे को जन्म दे सकती है लेकिन नॉर्मल डिलीवरी के कई फायदे है जो नीचे दिए हुए है।

  • यदि नॉर्मल डिलीवरी की जाये तो बच्चे की माँ को रिकवर होने में 1 महीने से भी कम समय लगता है।
  • यदि माँ नॉर्मल डिलीवरी के द्वारा बच्चे को जन्म देती है तो 24 से 48 घंटों के भीतर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज मिल जाता है।
  • सिजेरियन डिलीवरी कराने से महिला के शरीर में अधिक खून स्त्राव होता है और जलन होती है। इसके अलावा संक्रमण होने का खतरा भी रहता है।

FAQ in Hindi – आपके सवाल/हमारे जबाव

1. नॉर्मल डिलीवरी में कितना समय लगता है?

पहली बार नॉर्मल डिलीवरी होने में सात से आठ घंटों का समय लगता है। यदि आप दूसरी बार माँ बनने जा रही है तो यह समय कम हो सकता है।

2. Normal Delivery का सबसे बड़ा फायदा क्या है? (Normal Delivery Kaise Hoti Hai)

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि गर्भवती महिला को रिकवर होने में कम समय लगता है।

3. गर्भवती महिलाओं को किन-किन योगओं को अपनाना चाहिए?

मार्जरी आसन, बद्धकोणासन, वीरभद्रासन और त्रिकोणासन आदि योगाओं को अपनाना चाहिए।

4. नॉर्मल डिलीवरी के क्या रिस्क है?

योनि व गर्भाशय ग्रीवा को नुकसान पहुँचना और Pelvic Pain होना।

5. Normal Delivery Ke Liye Kya Karna Chahie?

स्वस्थ रहें, पौष्टिक भोजन खाएं, पानी पियें और तनावमुक्त रहें।

6. सिजेरियन डिलीवरी कब करानी चाहिए?

गंभीर बीमारी से पीड़ित महिलाओं को सिजेरियन डिलीवरी करानी चाहिए।

7. गर्भवती महिलाओं को क्या खाना चाहिए?

विटामिन B12, आयरन, ओमेगा 3 और अधिक से अधिक हरी सब्जियों का सेवन करें।

8. क्या बिना दर्द के नार्मल डिलीवरी होना संभव है?

जी हाँ यह संभव है, डॉक्टर्स के मुताबिक कमर के निचले भाग में स्थित रीढ़ की हड्डियों के बीच सुई लगाई जाती है। ऐसा करने से नार्मल डिलीवरी के दौरान दर्द नहीं होता है।

9. प्रेग्नेंट होने पर महिलाओं में क्या लक्षण दिखाई देते है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, पहले और चौथे सफ्ताह के बीच पेट दर्द और स्पॉटिंग दिखाई देना।
इसके अलावा थकान और कमजोरी महसूस होना आदि।

10. Normal Delivery Time कितना होता है?

5 से 8 घंटा।

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Conclusion –

दोस्तों आज की पोस्ट में हमने Normal Delivery Kaise Hoti Hai, डिलीवरी कैसे की जाती है और Normal Delivery Pain Symptoms आदि के बारे में भी बताया है। यदि आप प्रेगनेंसी से सम्बंधित या नॉर्मल डिलीवरी से सम्बंधित कोई भी सवाल पूछना चाहते हो तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो। धन्यवाद…

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