टाइफाइड को जड़ से खत्म करने का इलाज

टाइफाइड एक साधारण बुखार नहीं होता है बल्कि यह गर्मी के मौसम में तेजी से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है और गर्मी के मौसम में इस बीमारी के सबसे ज्यादा मरीज मिलते है। टाइफाइड बुखार को मियादी बुखार के रूप में जाना जाता है।

दूषित पानी और खराब खाना खाने की वजह से पाचन तंत्र और खून में साल्मोनेला टाइफी नाम बैक्टीरिया चले जाते है इस वजह से टाइफाइड बुखार होता है। Typhoid Infection होने पर मरीज का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट तक चला जाता है।

टाइफाइड को जड़ से खत्म करने का इलाज

टाइफाइड बुखार से छुटकारा पाना बहुत ही जरूरी है अन्यथा यह आपके लिवर के इन्फेक्शन का कारण बन सकता है और आपके इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। मार्केट में कई प्रकार की आयुर्वेदिक और अंग्रेजी दवाएं आती है जिनका उपयोग करके इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

यदि आप टाइफाइड को जड़ से खत्म करने का इलाज और टायफाइड कैसे होता है इस बारे में जानना चाहते हो तो इस पोस्ट को  शुरू से अंत तक पूरा पढ़ें।

टाइफाइड क्या है? – (What is Typhoid in Hindi)

यह एक प्रकार का संक्रमण रोग होता है जो बासी भोजन या प्रदूषित पानी पीने से होता है। यदि घर के किसी भी एक सदस्य को यह रोग हो जाता है तो घर के अन्य सदस्यों को को भी यह रोग होने का खतरा रहता है। मौसम बदलने के कारण और कुछ गलत आदतों के कारण यह रोग फैलता है।

इसे तेज बुखार के रूप में भी जाना जाता है और यह साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया द्वारा शरीर में फैलता है। इस संक्रमण से बचने के लिए व्यक्ति को जूठे खान-पीन से बचना चाहिए।

टायफाइड के लक्षण – (Typhoid Symptoms In Hindi)

यदि मरीज को शरीर में नीचे दिए हुए निम्न टाइफाइड लक्षण महसूस होते है तो डॉक्टर को जरूर दिखायें।

  • Typhoid का मुख्य लक्षण बुखार आना है।
  • शरीर में संक्रमण बढ़ने पर भूख की कमी होने लगती है।
  • मरीज को सिरदर्द और शरीर दर्द होना भी इन्फेक्शन का लक्षण हो सकता है।
  • सर्दी लगना, सुस्ती और आलस्य आना भी टाइफाइड का एक हिस्सा है।
  • यदि मरीज को 102-104 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर का बुखार होता है तो टाइफाइड हो सकता है।
  • इन सबके अलावा छाती में जलन, कब्ज और दस्त भी हो सकते है।

टाइफाइड को जड़ से खत्म करने का इलाज क्या है ? –

यदि आप टाइफाइड को जड़ से खत्म करना चाहते हो तो आपको अपने आहार और जीवनशैली में बदलाव करना होगा। यदि आप एक महीने तक हमारे द्वारा बताये हुए आहार का सेवन करते हो और जीवनशैली को अपनाते हो तो आपको एक महीने में फर्क नजर आने लग जायेगा।

आहार में बदलाव –

  • टाइफाइड होने पर प्याज, लहसुन और गंध वाले पदार्थ का सेवन न करें।
  • मसालेदार खाना पीना जैसे – भल्ले, डोसा और टिकिया को न खाएं।
  • आपको किसी भी प्रकार के ऐसे पदार्थ का सेवन नहीं करना है जिससे पेट में गैस बने।
  • Typhoid होने पर आपको मक्खन, घी, पेस्ट्री और मिठाईयाँ नहीं खानी है।
  • इस बीमारी में दारु-शराब और सिगरेट भूलकर भी न पियें।

जीवनशैली में बदलाव –

  • कच्चे फल और कच्ची सब्जी को न खाएं (Typhoid In Hindi)
  • किसी भी दुकान से पेय-पदार्थ और खाद्य-पदार्थ न खरीदें।
  • टायफाइड होने पर गर्म पानी और साबुन के साथ दिन में 4 से 5 बार अपने हाथों को धोएं।
  • आपको उबला हुआ पानी और गर्मा-गर्म भोजन खाना चाहिए।
  • इसके अलावा साफ पानी पियें और भोजन किये हुए अपने बर्तनों को खुद साफ करें। जिससे कोई दूसरा व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में न आएं।

टाइफाइड का आयुर्वेदिक इलाज –

2 से 3 ग्राम खूबकला, 5 मुनक्का और 4 या 5 अंजीर को 400 ग्राम पानी में डालकर गर्म करें। गर्म होने के बाद जब पानी 100 ग्राम रह जाये तो इसी ठीक तरह से मैश कर लें इसको छानकर किसी साफ-सुथरे बर्तन में कर लें। अब इसको बोतल में इकठ्ठा करके रख दें और सुबह व शाम को इसे पीयें। कुछ ही दिनों के भीतर आपको असर दिखाई देने लगेगा।

टाइफाइड का आयुर्वेदिक उपचार कैसे काम करेगा –

  • खूबकला – इसमें विटामिन्स, मिनरल, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट तत्व मौजूद होते है। जिसकी वजह से शरीर का तापमान नॉर्मल रहता है।
  • मुनक्का – इसमें पोटैशियम, आयरन, विटामिन ए, विटामिन डी और डायटरी फाइबर के गुण पाये जाते है जो शरीर की कमजोरी को दूर करते है और टाइफाइड बुखार से छुटकारा दिलाते है।
  • अंजीर – इसमें जिंक, कॉपर, मैंगनीज, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयरन और कैल्शियम प्रोटीन फाइबर के एंटीऑक्सीडेंट गुण पाये जाते है।

खूबकला, मुनक्का और अंजीर को मिलाकर गर्म पानी में गर्म करके इसके सेवन से टाइफाइड बुखार की आयुर्वेदिक दवा बनती है। 

टाइफाइड का घरेलु इलाज –

इससे राहत पाने के लिए ज्यादातर लोग सबसे पहले घरेलु नुस्खे अपनाते है। आइये जानते है इन नुस्खों के बारे में…

फलों के रस का सेवन – यदि ताजे फल का रस और पेय पदार्थ का सेवन किया जाये और उबले हुए पानी को अच्छे तरीके से पिया जाये तो टाइफाइड के कारण शरीर में होने वाली कमजोरी से राहत मिलती है। 

तुलसी का इस्तेमाल – तुलसी और सूरजमुखी के पत्तों का रस बनाकर पीने से बुखार के इलाज में मदद मिलती है लेकिन यह उपाय करने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लें।

लौंग का उपयोग – Typhoid बीमारी को ठीक करने के गुण लौंग में पाये जाते है। आपको यह उपचार करने के लिए 5 से 7 लौंग को आधे कप पानी में उबाले। उबालने के बाद पानी आधा रह जाये तो इसे छान लें। इसके बाद आप इस पानी को पूरा पियें। ऐसा करने से एक हफ्ते के भीतर आपको असर दिखाई देने लग जायेगा।

शहद का उपयोग – गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से यह उपाय बुखार में अच्छे तरीके से असर करता है।

सेब के जूस का सेवन – यदि सेव के जूस में अदरक का रस मिलाकर पिया जाये तो यह शरीर पर काफी अच्छा असर करता है।

टाइफॉइड बीमारी से कैसे बचें –

WHO ने इस बीमारी से बचने के लिए टाइफाइड इंजेक्शन नाम बताएं है जिनको लगवाने के बाद इस बीमारी से बचा जा सकता है।

  • वैक्सीन शॉट (Vaccine shot) – यह इंजेक्शन 2 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को लगाया जाता है।
  • ओरल वैक्सीन (Oral Vaccine) – यह 6 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को लगाया जाता है।

Typhoid FAQ in Hindi – आपके सवाल/हमारे जबाव

1. टाइफाइड को हिंदी में क्या कहते हैं? (Typhoid Meaning In Hindi)

आंत्र ज्वर कहते है।

2. टाइफाइड कितने दिन तक रहता है?

3 से 4 दिनों में इस बीमारी के लक्षण ठीक हो जाते है लेकिन समय पर इलाज न हो पाने की वजह से 1 से 2 हफ्तों तक यह रहता है।

3. टाइफाइड में चाय पीना चाहिए या नहीं?

पी सकते हो।

4. टाइफाइड में पपीता खाना चाहिए या नहीं? 

जी हाँ, इस बीमारी में पपीता का सेवन किया जा सकता है।

5. टाइफाइड की इंग्लिश दवा का क्या नाम है। 

Statin

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Conclusion –

दोस्तों आज की पोस्ट में हमने आपको बताया कि टाइफाइड को जड़ से खत्म करने का इलाज क्या है, टाइफाइड का देसी इलाज और बुखार की आयुर्वेदिक दवा के बारे में। आपको यह पोस्ट कैसी लगी कमेंट बॉक्स में बताएं।

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